अमेरिका और चीन काे अपना ‘जागीरदार’ न बनाएं दुनिया भर के देश : इमैनुएल मैक्रों

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पेरिस/सियोल। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक मंच पर एक बड़ा संदेश देते हुए समान विचारधारा वाले देशों से “स्वतंत्रता गठबंधन” बनाने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हालिया सार्वजनिक मतभेदों के बाद मैक्रों ने अमेरिका की “अनिश्चितता” और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच देशों से किसी एक शक्ति के “जागीरदार” न बनने की बात कही। दक्षिण कोरिया के सियोल में दिए अपने भाषण में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, लोकतंत्र और जलवायु जैसे साझा मूल्यों पर आधारित नई वैश्विक व्यवस्था बनाने का आह्वान किया, जो मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक अहम संकेत माना जा रहा है।

रूस की सरकारी नियंत्रण वाला अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रूस टुडे (आरटी) के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सार्वजनिक विवाद के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दुनिया भर के देशों से अपील की है कि वे अमेरिका या चीन के “जागीरदार” न बनें।

शुक्रवार को सियोल की यात्रा के दौरान, फ्रांसीसी राष्ट्रपतिने दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील, भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित अन्य देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून, लोकतंत्र और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर साझा प्रतिबद्धताओं के आधार पर एक “स्वतंत्रता गठबंधन” बनाने का आग्रह किया।

योनसेई विश्वविद्यालय में दिए गए अपने भाषण में फ्रांसीसी राष्ट्रपतिमैक्रों ने कहा कि दशकों तक, हमारे पास एक तथाकथित स्थिरता थी, जो इस अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और हमारे पास मौजूद कुछ निश्चितताओं पर आधारित थी। अब इसमें उतार-चढ़ाव आ रहा है। इस नई अव्यवस्था में हमें केवल मूकदर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए। हमें एक नई व्यवस्था का निर्माण करना होगा।

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उन्होंने आगे कहा कि हमारा उद्देश्य दो वर्चस्ववादी शक्तियों के जागीरदार बनना नहीं है। हम चीन के प्रभुत्व पर निर्भर नहीं रहना चाहते और न ही हम अमेरिका की अनिश्चितता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनना चाहते हैं।

इमैनुएल मैक्रोंने पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। साथ ही उन्होंने ट्रंप पर भी पलटवार किया, जिन्होंने नाटाे के यूरोपीय सदस्यों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की उनकी अपील को अनसुना किए जाने के बाद, संगठन को एक “कागजी शेर” कहकर उसका मजाक उड़ाया था।

पश्चिम एशिया में अमेरिका के पूर्व और वर्तमान हस्तक्षेपों का ज़िक्र करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि हम केवल बमबारी या सैन्य अभियानों के ज़रिए इस स्थिति को ठीक कर पाएंगे।

आरटी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से बताया कि फ्रांस ने रूस और चीन के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का विरोध किया, जो होर्मुज में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अधिकृत करता। इस प्रस्ताव पर मतदान मूल रूप से शुक्रवार को होना था, जिसे अब स्थगित कर दिया गया है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल के वर्षों में फ्रांस के रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसमें मिसाइल, ड्रोन और पनडुब्बी क्षमताओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। पिछले महीने उन्होंने कहा था कि फ्रांस जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों की सुरक्षा के लिए अपनी परमाणु सुरक्षा छतरी का विस्तार कर सकता है।

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