भारत से 100 रुपये से अधिक के सामान पर लगेगी कस्टम ड्यूटी, नेपाल के सत्तारूढ़ सांसदों ने जताया विरोध

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काठमांडू। भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर अनिवार्य रूप से सीमा शुल्क (कस्टम) लगाने के नेपाल सरकार के निर्णय पर सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने ही असंतोष जताया है। राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के सांसदों का कहना है कि इस फैसले से सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस निर्णय के विरोध में मधेश के युवाओं के एक समूह ने आज काठमांडू के माइतीघर में प्रदर्शन भी किया।

सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए आरएसपी के कुछ सांसद रविवार को गृहमंत्री सुदन गुरूंग से मिले और इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। मधेश से निर्वाचित आरएसपी के सांसद तपेश्वर यादव ने बताया कि उन्होंने सीमा नाकों को तुरंत सुचारु बनाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच ‘रोटी-बेटी’ का ऐतिहासिक संबंध है। सरकार के इस कठोर निर्णय से आम जनता प्रभावित हो रही है, इसलिए इस पर पुनर्विचार जरूरी है। तस्करी पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन इसके नाम पर व्यक्तिगत उपयोग के लिए सामान लाने वाले नागरिकों को परेशान करना उचित नहीं है।

इसी तरह, सिरहा-2 के आरएसपी सांसद शिवशंकर यादव ने भी सीमा क्षेत्र में नागरिकों को हो रही परेशानी के संबंध में गृहमंत्री से शिकायत की। उनका कहना है कि मधेश में संगठित तरीके से तस्करी होती रही है, जिसमें कभी-कभी प्रशासन की मिलीभगत भी देखी जाती है। हालांकि, तस्करी रोकने का सरकारी प्रयास सही है, लेकिन सभी पर एक जैसा नियम लागू करने से आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं।

सांसद यादव ने बताया कि उन्होंने इस समस्या का तत्काल समाधान निकालने और सीमा पर सहज वातावरण बनाने की मांग की है। उनके अनुसार, तस्करी नियंत्रण जरूरी है, लेकिन नीति बनाते समय आम लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मधेश के अन्य सांसदों ने भी इस मुद्दे पर सरकार और अपनी पार्टी के भीतर बात उठाई है। उनका मानना है कि सीमा क्षेत्र में तस्करी, नशीले पदार्थों और मनी लॉन्ड्रिंग पर कड़ा नियंत्रण होना चाहिए, लेकिन घरेलू और उत्पादन से जुड़े सामानों पर कुछ लचीलापन बरता जाना चाहिए।

इस निर्णय के विरोध में मधेश के युवाओं के एक समूह ने आज काठमांडू के माइतीघर में प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार मधेश क्षेत्र को दीर्घकालीन रूप से कमजोर करने की साजिश कर रही है और उन्होंने इस प्रावधान को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

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