कानूनी प्रक्रिया अपनाए बगैर जारी गैर-जमानती वारंट निरस्त

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प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सोनभद्र के उस्मान अली के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट निरस्त कर दिया है।

राकेश जायसवाल ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेरफेर (आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471) के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। विवेचना अधिकारी ने मामले में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनभद्र ने 9 जनवरी 2025 को खारिज कर उस्मान अली को समन जारी कर दिया था। हाजिर न होने पर गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था।

न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट को गैर-जमानती वारंट जारी करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि 09 जनवरी 2025 का मूल तलबी आदेश पहले ही रद्द कर दिया गया है, इसलिए उसके बाद के सभी आदेश (5 जून 2025 के आदेश सहित) निष्प्रभावी हो गए हैं।

अदालत ने मामले को संबंधित मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया है, ताकि उच्च न्यायालय द्वारा की गई इन-हाउस जांच और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से आदेश पारित किया जा सके।

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