-👉 याचिकाकर्ता को फटकार, उच्चतम न्यायालय में प्रवेश करने पर रोक लगाने की चेतावनी
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र घोषित करने और आजाद हिन्द फौज को आजादी का श्रेय देने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि वो न्यायिक समय को बर्बाद कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको उच्चतम न्यायालय में प्रवेश करने पर रोक लगाई जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिका हम पहले ही खारिज कर चुके हैं। पहले भी कोर्ट याचिकाकर्ता को फटकार लगा चुकी है। जब मुख्य न्यायाधीश ने कोर्ट से पूछा कि क्या आपने इसके पहले भी याचिका दाखिल की थी तो याचिकाकर्ता ने कहा कि इस बार अलग है। तब कोर्ट ने पूछा कि याचिका किसने ड्राफ्ट किया है। तब याचिकाकर्ता ने कहा कि मुखर्जी सर ने।
याचिका में कहा गया था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज ने 1947 में देश की आजादी हासिल की थी, इसलिए नेताजी को राष्ट्रीय पुत्र घोषित किया जाए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता इस याचिका की आड़ में पब्लिसिटी चाहता है। उसके बाद कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वो इस तरह की याचिकाएं स्वीकार न करें।









