नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर कड़ा एतराज जताया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने विशेष गहन पुनरीक्षण के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता से कहा कि ये राज्य सबसे ज्यादा ध्रुवीकरण वाला राज्य है। यहां हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को घेर कर बंधक बनाकर रखना न केवल उन न्यायिक अधिकारियों की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि उच्चतम न्यायालय की गरिमा के खिलाफ भी है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक ब्लॉक डेवलपमेंट अफसर के कार्यालय में एक अप्रैल की शाम करीब साढ़े तीन बजे विशेष गहन पुनरीक्षण के काम में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाकर रखा गया। सात न्यायिक अधिकारियों में तीन महिला जज थीं। बंधक बनाने वालों के खिलाफ देर शाम तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के मुताबिक न तो डीएम और न ही एसपी मौके पर पहुंचे। उसके बाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को राज्य के डीजीपी को फोन कर जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया। बाद में रात 12 बजे न्यायिक अधिकारियों को छोड़ा गया।








