रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भारी तनाव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र में स्थित नकटी गांव में 26 जून 2026 की रात को प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने और घर खाली करने का 48 घंटे का नोटिस दिए जाने पर भारी तनाव है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच वार्ड 16 और 17 के ग्रामीणों ने इस बेदखली की कार्रवाई का जबरदस्त विरोध किया, जिससे पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने आ गए हैं । सैकड़ों ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, अपने घरों को बचाने के लिए लाठी-डंडों के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

अपनी मांग और बेदखली की कार्रवाई को रुकवाने के लिए नकटी गांव के ग्रामीणों का एक बड़ा दल आज सुबह सांसद बृजमोहन अग्रवाल के निवास पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचा है।ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत नकटी की आमसभा ने इस प्रस्ताव पर पहले ही लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्रवाई हुई तो 1300 से अधिक आबादी वाला पूरा गांव प्रभावित होगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें 25 जून की बैक-डेट वाला नोटिस शुक्रवार, 26 जून की रात को आकर चस्पा किया। इससे उन्हें अपनी बात रखने या वैकल्पिक व्यवस्था करने का बिल्कुल समय नहीं मिला। ग्रामीणों का तर्क है कि वे लोग पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं और उनके कई मकान सरकार द्वारा ही के तहत स्वीकृत कर बनाए गए हैं। इसके अलावा वहाँ सरकारी सांस्कृतिक भवन और पानी की टंकी भी बनी हुई है, जिसे अब अचानक अवैध कब्जा बताकर खाली कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने सैकड़ों परिवारों को बेदखल करने का नोटिस जारी किया था। लेकिन उस समय जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के हस्तक्षेप और अमित बघेल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एकजुट होकर कड़ा आंदोलन किया था। जिसके कारण कार्रवाई रोक दी गई थी।

ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए उन्हें बेघर करना गलत है। आक्रोशित ग्रामीणों ने रात में प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव किया और “भाजपा नेता वापस जाओ” के नारे भी लगाए।

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इससे पहले भी इसी मुद्दे को लेकर गांव में विवाद और प्रदर्शन हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार विधायक कॉलोनी के लिए गांव को खाली करा रही है। उनकी पुश्तैनी जमीन पर भूमाफियाओं और रसूखदार लोगों की नजर है। उन्हें बेघर करने की साजिश रची जा रही है।

राजस्व विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह 38 एकड़ की भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, जिसे प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए खाली कराया जा रहा है और अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। एहतियात के तौर पर तनाव को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वर्तमान में गांव में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और पुलिस व प्रशासनिक अमला ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास कर रहा है।

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