मऊ। जिले की जातीय सत्यता समिति अपने उद्देश्य से भटक गई हैँ। फर्जी जाति प्रमाण पत्रों को लेकर यहां पड़ी शिकायते अफसरों के द्वारा पदीय अधिकारों की आड़ में की जा रही मनमानियो की भेंट चढ़ रही हैँ। समाज कल्याण अधिकारी आईजीआरएस पड़ पड़ी शिकायतों के बिना अंतिम निस्तारण किये निस्तारित कराते हैँ तों अन्य शिकायतों का अंतिम रूप से निस्तारण कराने में दिलचस्पी नहीं ली जाती हैँ।
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने आई जी आर एस पर पड़ी एक शिकायत को लेकर किये गए सवाल के जबाब में बताया कि मामले में तहसीलदार को पत्र लिख कर जांच आंख्या मांगने के बाद “आईजीआरएस” की शिकायत को निस्तारित कर दिया गया हैँ। उन्होंने कहा कि मामले में तलब कीगाई जाँच आंख्या की पीडीएफ को लगाकर आवेदक को तहसीलदार के समक्ष आई जी आर एस करना होगा, वे तहसीदार की जांच आंख्या का इंतजार नहीं कर सकते हैँ। समाज कल्याण अधिकारी के द्वारा पदीय अधिकारों की ऐड में की जा रही मनमानी सी जिला जाति सत्यता समिति के समक्ष पड़ रही शिकायतों को निर्धारित समय सीमा में नहीं हों पा रहा हैँ।
समाज कल्याण अधिकारी और तहसीलदार के बींच डील!
जाँच आंख्या समय से मिले, को लेकर समाज कल्याण अधिकारी गंभीर नहीं हैँ, तहसीलदार और समाज कल्याण अधिकारी की मौन साधना को देखते हुए ऐसा प्रतीत हों रहा हैँ, तहसीलदार और समाज कल्याण अधिकारी के बींच जातियों पर उठे सवालों की निस्तारण को अतकाने को लेकर डील हैँ।
जांच आंख्या सुपुर्द करने तहसीदार कर रहे मनमानी, समाज कल्याण अधिकारी नहीं दे रहे रिमाइंडर
तहसीलदार भी मामले मी जाँच कर आंख्या देने में मनमानी कर रहे हैँ। तहसीलदार मधुबन से लेकर तहसीदार मऊ तक जाति प्रमाण पत्रों की असलियत का अंकन करने में मनमानी कर रहे हैँ। तहसीदार मधुबन ने महीनो बीटने के बाद मधुबन के हैबतपुर निवासी उपेंद्र कुमार की जाति प्रमाण पत्र पर उठे सवालों की असलियत पर आज तक चुप हैँ तों तहसीदार मऊ ग्राम विकास अधिकार संजय प्रसाद की जाति प्रमाण पत्र को लेकर मौन साधना में हैँ। तहसीदार से मांगी गई जाँच आंख्या में देरी पर समाज कल्याण अधिकारी का मौन क्यों? जबाब से पीछे भाग रहे जिम्मेदार









