मप्र सरकार ने टीईटी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की रिव्यू पिटीशन

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भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े लंबे विवाद के बीच राज्य सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाते हुए उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

मध्य प्रदेश शासन द्वारा शुक्रवार को शाम चार बजे यह पुनर्विचार याचिका ई-फाइलिंग के माध्य से दाखिल की है, इसकी अधिकारिक पुष्टि उच्चतम न्यायालय की ई-फाइलिंग रसीद से हुई है। इस कदम से प्रदेश के लाखों प्रभावित शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पात्रता और सेवाओं पर तकनीकी आधार पर सवाल खड़े हो गए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में सकारात्मक आश्वासन दिया था। इसके तुरंत बाद सरकार द्वारा कानूनी प्रक्रिया पूरी करना यह संकेत देता है कि मामले को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संयोजक राकेश दुबे ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के सरकार के कदम का स्वागत किया है, लेकिन इसे शिक्षकों की मूल मांगों से अलग बताया। उनका कहना है कि सरकार को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन रिव्यू पिटीशन दाखिल होने के बावजूद शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा का दबाव बनाना समझ से परे है।

मप्र शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर ने कहा कि यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों को भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है और सरकार ने अपना वादा निभाया है। वहीं, प्रांतीय महामंत्री राकेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक निर्णय आएगा।

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अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संयोजक राकेश दुबे ने सवाल उठाया कि जब मामला पहले से ही उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो 2 मार्च को जारी टीईटी परीक्षा का आदेश क्यों लागू रखा गया है। उन्होंने मांग की कि जब तक रिव्यू पिटीशन पर अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक इस आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि शिक्षकों में व्याप्त भय और असमंजस की स्थिति खत्म हो सके।

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