नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने ऑपरेशन सिंदूर के दाैरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी देने में देरी करने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने के लिए एसआईटी के अनुरोध पर फैसला दो हफ्ते पहले ही आ जाना चाहिए था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि बहुत हो गया। अब हमारे आदेश का पालन कीजिए। दरअसल, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विजय शाह पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी पर फैसला अभी लंबित है। शाह की टिप्पणियों को गलत तरीके से समझा गया होगा। मेहता ने कहा कि शाह ने जो कहा वो दुर्भाग्यपूर्ण है। वो महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे लेकिन मेहता की दलील से उच्चतम न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक राजनेता के रुप में वो महिला अधिकारी की प्रशंसा करने का तरीका बखूबी जानते हैं। इसके पहले 19 जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार से विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दो हफ्ते में अनुमति देने पर विचार करने को कहा था। उल्लेखनीय है कि 19 मई 2025 को उच्चतम न्यायालय ने विजय शाह को जांच में शामिल होने की शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विजय शाह को उनके बयान के लिए फटकार लगाई थी। न्यायालय ने कहा था कि इस बयान से पूरा देश शर्मिंदा है। इसके पहले 15 मई 2025 काे उच्चतम न्यायालय ने विजय शाह को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप ऐसा बयान कैसे दे सकते हैं, आप जानते हैं आप कौन हैं, आप सरकार में मंत्री हैं। जब देश संकट से गुजर रहा हो तो हर शब्द का महत्व होता है, अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। विजय शाह की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी गई है। दरअसल इंदौर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लिए बिना विवादित बयान दिया था। इस बयान के बाद काफी हंगामा खड़ा हुआ था। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए विजय शाह पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद विजय शाह पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
उल्लेखनीय है कि कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में से एक थीं जिन्होंने बीते साल पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सीमा पार कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में मीडिया को जानकारी दी थी।








