एमडीएमए ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, दो नाइजीरियाई समेत चार तस्कर गिरफ्तार

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नई दिल्ली। राजधानी में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की (एएनटीएफ) यूनिट ने पश्चिमी दिल्ली में सक्रिय एक संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो नाइजीरियाई नागरिकों समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में करीब 90 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली एमडीएमए ड्रग बरामद की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग एक करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा नकदी, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और भारी मात्रा में पैकिंग सामग्री भी जब्त की गई है।

क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त धीरज कुमार ने रविवार को बताया कि इस ऑपरेशन को पुख्ता तकनीकी इनपुट और लगातार निगरानी के आधार पर अंजाम दिया गया। एएनटीएफ को पश्चिमी जिले में ड्रग सप्लाई की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद इंस्पेक्टर शिव कुमार के नेतृत्व में एसआई देव, एएसआई नीरज, एएसआई विनय, हेड कांस्टेबल दीपक समेत अन्य पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई।

6 अप्रैल 2026 को गणेश नगर, तिलक नगर स्थित एक ठिकाने पर छापेमारी कर गुरमीत सिंह और मुकेश कुमार उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान गुरमीत के पास से 69 ग्राम और मुकेश के पास से 4 ग्राम एमडीएमए बरामद हुई। मौके से 112 जिप-लॉक पॉलिथीन, तीन इलेक्ट्रॉनिक तराजू, पैकिंग सामग्री और 37,500 रुपये नकद भी जब्त किए गए, जो ड्रग तस्करी से अर्जित रकम मानी जा रही है।

पुलिस पूछताछ और रिमांड के दौरान इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय लिंक भी सामने आए। 9 अप्रैल को पुलिस ने नाइजीरियाई नागरिक मैनकाबो डेविड को गिरफ्तार किया। जिसके पास से 10.12 ग्राम एमडीएमए बरामद हुई। इसके बाद एमेका इमैनुएल उर्फ पीटर को भी गिरफ्तार किया गया। जिसके पास से 7.12 ग्राम एमडीएमए और दो स्कूटी बरामद हुईं। एमेका पहले भी वर्ष 2018 में एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार हो चुका है और पांच साल की सजा काट चुका है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित और तकनीकी तरीके से काम कर रहा था। आरोपित पासवर्ड आधारित एंट्री सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी का इस्तेमाल कर पुलिस से बचने की कोशिश करते थे। गिरोह के सदस्य नाइजीरियाई सप्लायरों से ड्रग मंगाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करते थे। गुरमीत सिंह इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था, जो सप्लाई चेन और संपर्कों को संभालता था, जबकि मुकेश वितरण और लॉजिस्टिक्स का काम देखता था। दोनों आरोपित पिछले करीब दो साल से एक किराए के मकान में कथित एस्कॉर्ट सर्विस की आड़ में इस अवैध कारोबार को चला रहे थे। पुलिस अधिकारी के अनुसार

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ड्रग की खरीद कीमत 1200 से 1600 रुपये प्रति ग्राम थी, जिसे बाजार में करीब 2500 रुपये प्रति ग्राम में बेचा जाता था। पुलिस अब इस रैकेट के पूरे नेटवर्क, सप्लायरों और अन्य सहयोगियों की पहचान में जुटी है।

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