मऊ। अबैध जाति प्रमाण पत्रों की मांग करने वालों की सच्चाई देर से ही सही , उजागर होने लगी है। हाल के दिनों मे थाना सरायलखंसी के सरया निवासी रंजीत कुमार गोंड के द्वारा कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से राजस्व कर्मचारियों को अपने आपराधिक साजिस मे लेकर बनवाये गए फर्जी जाती प्रमाण पत्र को राज्य स्तरीय जातिय सत्यता समिति के द्वारा निरस्त किये जाने की खबर है।
शिकायत कर्ता राम बदन यादव ने खरी दुनिया से बातचीत मे बताया कि उनके गांव के कई कहार जाति के लोगो के द्वारा कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से राजस्व कर्मचारियों को अपने आपराधिक साजिस मे लेकर अनुसूचित जनजाति मे सुचिबद्ध गोंड जाति के लिए वर्ष 1950 मे जारी राजज्ञा के माध्यम से सरकारी नौकरियों आदि मे दिए गए आरक्षण की व्यवस्था का लाभ लेने के लिए यूपी के कई जिलों मे मौजूद कहार भड़भुजा विरादरी के लोगो के द्वारा फर्जी गोंड जाति का जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया है। जिसमे से उनमे गांव के रंजीत एक बानगी भर है । राजज्ञा के अनुसार अनुसूचित जनजाति मे सुचिबद्ध गोंड जाति के लोग कुमायु मंडल, सहित सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के हिस्सों मे पाए जाते है।
श्री यादव ने बताया कि उनकी शिकायत पर सुनवाई के बाद जिला जाति सत्यता समिति ने रंजीत यादव को कहार पाते हुए, उनके द्वारा राजस्व कर्मचारियों को अपने आपराधिक साजिस मे लेकर बनवाये गए फर्जी अनुसूचित जनजाति के परमन पत्र को निरस्त कर दिया था। इसके बाद रंजीत ने मंडल स्तरीय अपिलीय फोरम आजमगढ़ के समक्ष अपील दाखिल की जिसकी सुनवाई मे मंडल स्तरीय जाति सत्यता समिति द्वारा जिला स्तरीय जाति सत्यता समिति के आदेश को यथावत रखा गया। इसके बाद रंजीत के द्वारा राज्य स्तरीय जाति सत्यता समिति के समक्ष अपील योजित की। जांच और सुनवाई के बाद राज्य स्तरीय जाति सत्यता समिति ने रंजीत के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया।
.. और जांचो को दबा रहे अफसर
उन्होंने बताया की जिले कई लोगो के द्वारा जिलाधिकारी मऊ को कई आवेदन और किये गए है.जिसकी जाँच को विभागीय अफसरों के द्वारा जानबूझकर दबाया जा रहा है।









