नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला करने के मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अनूप जयराम भांभानी की अध्यक्षता वाली बेंच ने आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज करने का आदेश दिया।
तीस हजारी कोर्ट ने 26 दिसंबर 2025 को रेखा गुप्ता पर हमले के दो आरोपितों राजेश खिमजी और तहसीन सैयद के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने तहसीन सैयद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 132, 109(1) और राजेश खिमजी के खिलाफ 109(1), 115(2), 221 और 132 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
इस मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि रेखा गुप्ता पर हमला करने वाले आरोपित राजेश खिमजी ने एक सपने के बाद ऐसा किया था। चार्जशीट में कहा गया है कि राजेश खिमजी ने सपने में देखा कि एक शिवलिंग के बगल में बैठे कुत्ते ने उससे कहा कि दिल्ली में कुत्ते कष्ट में हैं। चार्जशीट में कहा गया है कि राजेश खिमजी ने फेसबुक पर वीडियो देखे, जिसमें कुत्तों की समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को जिम्मेदार ठहराते हुए लोग प्रदर्शन कर रहे थे। चार्जशीट में इस बात का खुलासा हुआ है कि राजेश खिमजी ने मई में अयोध्या में बंदरों के सवाल पर भूख हड़ताल की थी।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर 2025 को चार सौ पेजों की चार्जशीट दाखिल की थी। दिल्ली पुलिस ने आरोपितों राजेश खिमजी और तहसीन सैयद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या की कोशिश, लोकसेवक के काम में बाधा डालने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक राजेश खिमजी आवारा कुत्तों को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के रुख से नाराज था। उच्चतम न्यायालय ने 11 अगस्त 2025 को अपने फैसले में कहा था कि आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए। इस फैसले का रेखा गुप्ता ने पुरजोर समर्थन किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इससे नाराज राजेश खिमजी ने रेखा गुप्ता पर 20 अगस्त 2025 को उस समय हमला किया जब वो जन सुनवाई कर रही थीं।








