अस्पतालों की होगी अग्नि सुरक्षा जांच, सीएमएचओ की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह जयपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में स्थापित अस्पतालों में पर्याप्त फायर फायटिंग सिस्टम के संबंध में रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने कहा कि यदि किसी भी अस्पताल में उचित अग्निशमन प्रणाली नहीं पाई जाती है तो संबंधित सीएमएचओ की ओर से तय टाइम लाइन के साथ उसे नोटिस जारी किए जाए। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।

अदालत ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि बीस बेड से अधिक क्षमता वाले हर अस्पताल व क्लिनिक की ओर से पर्याप्त सुरक्षा उपायों को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों की पालना की जा रही है। अदालत ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक अस्पताल में नियमित रूप से फायर ड्रिल आयोजित की जाए और फायर सेफ्टी प्रणाली का ज्ञान रखने वाले कम से कम दो विशेषज्ञों को प्रत्येक सरकारी अस्पताल में तैनात किया जाए। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि निजी अस्पतालों को भी इसी तरह के कदम उठाने होंगे और अपनी रिपोर्ट संबंधित सीएमएचओ को सौंपनी होगी। अदालत ने इस संबंध में जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में सुनवाई तय करते हुए रिपोर्ट पेश करने को कहा है। गौरतलब है कि नवंबर, 2024 में झांसी के एक मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशु वार्ड में आग लगने से दस नवजातों की मौत हो गई थी। इस पर अदालत ने प्रदेश के सरकारी अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं होने के मामले में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए अधिवक्ता राजेश मुथा को न्यायमित्र नियुक्त किया था।

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