नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने चंबल अभयारण्य में अवैध खनन जारी रहने पर राजस्थान सरकार को फटकार लगाई है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य के कई अफसरों को 19 मई को कोर्ट में तलब किया है।
कोर्ट ने राजस्थान सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह), खनन, वित्त, वन, पर्यावरण, परिवहन और सड़क सुरक्षा विभागों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रुप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इन सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो निजी तौर पर हलफनामा दाखिल कर बताएं कि कोर्ट के पहले के आदेश के पालन के लिए उन्होंने क्या किया।
उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर चिंता जताई कि खनन क्षेत्र में ट्रैक्टर्स और वाहनों की निर्बाध आवाजाही की पहचान नहीं की जा रही है। कोर्ट ने अवैध खनन का परिवहन रोकने के लिए उठाये गए कदमों की विस्तृत जानकारी भी मांगी है। इसके पहले 17 अप्रैल को चंबल अभ्यारण्य में अवैध खनन पर सख्त रवैया अपनाते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और जीपीएस ट्रैकिंग करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि अगर अवैध खनन का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत कार्रवाई करें और मौके पर टीम भेजें और कठोर कदम उठाएं।
कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें ये सुनिश्चित करें कि अवैध खनन से प्रभावित इलाकों में ऊंचे खंभों पर हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी लाइव फीड संबंधित जिले के एसपी या एसएसपी और संबंधित वन अधिकारी की सीधी निगरानी में रहे। कोर्ट ने आदेशों के उल्लंघन को अवमानना मानते हुए अफसरों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उच्चतम न्यायालय ने इन राज्यों से आदेश के अनुपालना संबंधी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि खनन गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों जैसे ट्रैक्टर, अर्थ मूवर्स और लोडर्स आदि में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएं। इससे इन वाहनों की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। कोर्ट ने साफ कहा था कि जो भी वाहन चंबल इलाके से गुजरे उसमें ट्रैकर लगा होना चाहिए ताकि अवैध रेत परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
इसके पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मुरैना में एक फॉरेस्ट गार्ड पर रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर ट्राली चढ़ा देने के मामले पर कड़ा एतराज जताया था। कोर्ट ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब राज्य की मशीनरी अपने अधिकारियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में नाकाम है तो उसका क्या अस्तित्व है। अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध खनन हो रहे हैं।
दो अप्रैल को कोर्ट ने चंबल नदी में अवैध खनन से वन्यजीवों को हो रहे नुकसान पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि खनन माफिया चंबल के नये डकैत हैं। कोर्ट ने कहा था कि राजस्थान में खनन माफिया पुलिस, वन और प्रशासनिक अधिकारियों की हत्या कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी, जिसमें चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर भूमि को संरक्षित क्षेत्र से बाहर करने की कोशिश की गई थी।









