नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय बीटेक के चार वर्षीय कोर्स की तरह लॉ के चार वर्षीय कोर्स की संभावना तलाशने के लिए लीगल एजुकेशन कमीशन स्थापित करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर अप्रैल में सुनवाई करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की जरुरत है। न्यायपालिका केवल एक पक्ष है। शिक्षाविद्, विधि विशेषज्ञ, बार और नीति के जुड़े शोधकर्ता भी हैं। ऐसे विषयों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। हम अपने विचार थोप नहीं सकते।
यह याचिका वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। इसके पहले अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायालय
में भी याचिका दायर की थी। मई, 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को ये निर्देश दे कि नई शिक्षा नीति 2020 के मुताबिक पांच वर्षीय लॉ कोर्स को डिजाइन किया जाए। इसके लिए पूर्व जजों, न्यायविदों और शिक्षाविदों की एक समिति का गठन किया जाए, तो ये पड़ताल करे कि पांच वर्षीय लॉ कोर्स को चार वर्षीय कोर्स बनाया जा सके। याचिका में कहा गया है कि बीए, बीबीए, बीकॉम सभी लॉ की तरह की ग्रेजुएशन के कोर्स हैं। ऐसे में पांच वर्षीय एलएलबी की जगह चार वर्षीय एलएलबी कोर्स को डिजाइन किया जाए।
याचिका में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति 2020 में चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स की बात की गई है, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने न तो पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स की समीक्षा की और न ही चार वर्षीय एलएएलबी कोर्स शुरु किया। जहां बीटेक के छात्रों को आईआईटी चार वर्षों में ग्रेजुएशन की डिग्री देती है, लेकिन एलएलबी करने वालों को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में पांच वर्षो में ग्रेजुएशन की डिग्री दी जाती है। ऐसे में पांच वर्षीय लॉ कोर्स करनेवालों का बाकी ग्रेजुएशन कोर्स के मुकाबले एक साल ज्यादा देना होता है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में पांच वर्षीय लॉ कोर्ट पैसा ऐंठने का साधन बन गया है।
याचिका में कहा गया है कि पहले 12वीं के बाद तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स होती थी। पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी ने 17 साल की उम्र में वकील के रुप में प्रैक्टिस शुरु कर दी थी। मशहूर वकील फाली एस. नरीमन ने 21 साल की उम्र में वकील के रुप में प्रैक्टिस शुरु की थी।








