“एसटी” के जाति प्रमाण पत्रों की जाँच के बाद “यूपीएससी” से नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग

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St कटेगरी में सेलेक्ट हुए लोगो की जिला जाति सत्यता समिति से जाँच की मांग 
मऊ। राजस्व कर्मचारियों को अपनी आपराधिक साजिस में लेकर कूट रचित जाति प्रमाण पत्र बनवाकर, उसको यह जानते हुए कि यह जाति प्रमाण पत्र फर्जी है, सरकारी अभिलेखों में लगा कर कई लोग वीडीओ तो जीएसटी इंसल्पलेक्टर बन गए है। देवरिया और बलिया के दो लोगो को अफसर बनने के बाद उन्हें भड़भुजा / कहार जाति का बताया जा रहा है।

मूल आदिवासी जनजाति कल्याण समिति, कहार / भड़भुजा विरादरी के अधिकांश लोगो पर अनुसूचित जनजाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर अनुसूचित जन जाति के आरक्षण को हड़पने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन से अफसर बने लोगो को चिन्हित कर जिला जाति सत्यता समिति से जाँच कराकर नियुक्ति पत्र देने की मांग के साथ विधिक कार्यवाही की भी मांग कर रही है।

समिति का कहना है कि देवरिया, गोरखपुर, मऊ, बलिया आदि में गोंड जाति नहीं पाई जाति है, बावजूद इसके यहां से अधिकांश कहार / भड़भुजा विरादरी के लोग अनुसूचित जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे है। उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन से भी कई लोग कूट रचित दस्तावेजो के आधार पर राजस्व कर्मचारियों को अपनी आपराधिक साजिस में लेकर बनवाये गए फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी हथियाये है।

समिति एसटी के जाति प्रमाण पत्रों पर सेलेक्ट हुए लोगो की जाति सत्यता समिति से जाँच के बाद नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग करती है।

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