महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर पक्ष-विपक्ष के दावे, गोगोई ने बताया संविधान विरोधी, सूर्या बोले- दक्षिण को फायदा

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नई दिल्ली। संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसे जटिल बना रही है। जबकि, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि इन विधेयकों पर विपक्ष का विरोध राजनीतिक रूप से प्रेरित है और दक्षिण भारत को इससे नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा।

लोकसभा में आज चर्चा के दौरान गौरव गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना गलत है। सरकार बार-बार जनगणना और परिसीमन का बहाना बनाकर महिलाओं को अधिकार देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और उनकी मांग है कि इसे तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इसे मौजूदा 543 सीटों के साथ ही लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को तुरंत प्रतिनिधित्व मिल सके। यदि सरकार 2023 में विपक्ष की बात मानती तो 2024 के चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू हो जाता। सरकार महिला आरक्षण के नाम पर इसे टालने की कोशिश कर रही है और यह बिल महिला विरोधी, संविधान विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ है।

वहीं, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि विपक्ष का परिसीमन विरोध राजनीतिक रूप से प्रेरित है और दक्षिण भारत की कुछ पार्टियां भ्रम फैलाने का काम कर रही हैं। विपक्ष के तर्क के हिसाब से अमीरों के पास ज्यादा वोट और गरीबों के पास कम वोट होंगे। विपक्ष और कुछ क्षेत्रीय दल केवल घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे दक्षिण भारत को नुकसान नहीं होगा बल्कि फायदा होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30 होंगी, तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होंगी और आंध्र प्रदेश की सीटें 25 से बढ़कर 37 होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यदि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होता तो दक्षिण भारत को नुकसान होता लेकिन सरकार की वर्तमान योजना से ऐसा नहीं होगा। हर राज्य में सीटों को करीब 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला ऐतिहासिक है और यह सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करेगा। परिसीमन जरूरी संवैधानिक प्रक्रिया है।

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