नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि त्वरित सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने हत्या के एक आरोपित को जमानत देते हुए ये बातें कही।
उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता मनोज मचारे को जमानत दी। मनोज मचारे करीब चार साल से जेल में बंद था। इसके पहले याचिकाकर्ता ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की था। उच्च न्यायालय ने मनोज मचारे को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
मामला महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के शाहपुर का है, जहां एक पारिवारिक कार्यक्रम में एक व्यक्ति पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता एक नवंबर 2022 से न्यायिक हिरासत में था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2024 से आरोप तय कर दिया था। आरोप तय होने के बाद अभी तक एक भी गवाही दर्ज नहीं की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने पाया कि करीब चार साल तक बिना किसी ट्रायल के याचिकाकर्ता जेल में है। ऐसे में उसे जमानत दी जाती है।









